जितनी भीड़ बढ़ रही है जमाने में । लोग उतने ही अकेले होते जा रहे हैं ।।
बडी हसरत से पटक पटक के गुजर गई, कल शाम मेरे शहर से आंधी! !!!!!!
वो पेड आज भी मुसकुरा रहे है, जिन्हे हुनर था थोडा झुक जाने का।।।
वो पेड आज भी मुसकुरा रहे है, जिन्हे हुनर था थोडा झुक जाने का।।।
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