Saturday, 9 September 2017

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पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म.
पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं। अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग. मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।
ये प्रकृति की शक्ति है और बलबीर सिंह शेखावत जी की स्टडी है जो वर्तमान में as a Govt. Pharmacist अपनी सेवाएँ सीकर जिले में दे रहें हैं। आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है। विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है।
तो आइये जानते हैं उन्ही से। University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीता के पत्तो में कैंसर कोशिका को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। Nam Dang MD, Phd जो कि एक शोधकर्ता है, के अनुसार पपीता की पत्तियां डायरेक्ट कैंसर को खत्म कर सकती है, उनके अनुसार पपीता कि पत्तिया लगभग 10 प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है जिनमे मुख्य है।
breast cancer, lung cancer, liver cancer, pancreatic cancer, cervix cancer, इसमें जितनी ज्यादा मात्रा पपीता के पत्तियों की बढ़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है, अगर पपीता की पत्तिया कैंसर को खत्म नहीं कर सकती है लेकिन कैंसर की प्रोग्रेस को जरुर रोक देती है।। तो आइये जाने पपीता की पत्तिया कैंसर को कैसे खत्म करती है?
1. पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की उत्पादन को ब़ढाता है जो की इम्यून system को शक्ति प्रदान करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म किया जाता है।
2. पपीता की पत्तियों में papain नमक एक प्रोटीन को तोड़ने ( proteolytic) वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में बचा रहना मुश्किल हो जाता है। Papain blood में जाकर macrophages को उतेजित करता है जो immune system को उतेजित करके कैंसर कोशिका को नष्ट करना शुरू करती है, chemotheraphy/ radiotheraphy और पपीता की पत्तियों के द्वारा ट्रीटमेंट में ये फर्क है कि chemotheraphy में immune system को दबाया जाता है जबकि पपीता immune system को उतेजित करता है, chemotheraphy और radiotheraphy में नार्मल कोशिका भी प्रभावित होती है पपीता सोर्फ़ कैंसर कोशिका को नष्ट करता है। सबसे बड़ी बात के कैंसर के इलाज में पपीता का कोई side effect भी नहीं है।।
कैंसर में पपीते के सेवन की विधि
कैंसर में सबसे बढ़िया है पपीते की चाय। दिन में 3 से 4 बार पपीते की चाय बनायें, ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। अब आइये जाने लेते हैं पपीते की चाय बनाने की विधि।
1. 5 से 7 पपीता के पत्तो को पहले धूप में अच्छी तरह सुखा ले फिर उसको छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लो आप 500 ml पानी में कुछ पपीता के सूखे हुए पत्ते डाल कर अच्छी तरह उबालें।
इतना उबाले के ये आधा रह जाए। इसको आप 125 ml करके दिन में दो बार पिए। और अगर ज्यादा बनाया है तो इसको आप दिन में 3 से 4 बार पियें। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रीज में स्टोर का दे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर ले। और ध्यान रहे के इसको दोबारा गर्म मत करें।
2. पपीते के 7 ताज़े पत्ते लें इनको अच्छे से हाथ से मसल लें। अभी इसको 1 Liter पानी में डालकर उबालें, जब यह 250 ml। रह जाए तो इसको छान कर 125 ml. करके दो बार में अर्थात सुबह और शाम को पी लें। यही प्रयोग आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।
पपीते के पत्तों का जितना अधिक प्रयोग आप करेंगे उतना ही जल्दी आपको असर मिलेगा। और ये चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है।
कब तक करें ये प्रयोग
वैसे तो ये प्रयोग आपको 5 हफ़्तों में अपना रिजल्ट दिखा देगा, फिर भी हम आपको इसे 3 महीने तक   इस्तेमाल करने का निर्देश देंगे। और ये जिन लोगों का अनुभूत किया है उन लोगों ने उन लोगों को भी सही किया है, जिनकी कैंसर में तीसरी और चौथी स्टेज थी।
😊😊😊😊 
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Friday, 8 September 2017

Women help trips

1. एक नारी को तब क्या करना चाहिये जब वह देर रात में किसी उँची इमारत की लिफ़्ट में किसी अजनबी के साथ स्वयं को अकेला पाये ? 
Police का कहना है: जब आप लिफ़्ट में प्रवेश करें और आपको 13 वीं मंज़िल पर जाना हो, तो अपनी मंज़िल तक के सभी बटनों को दबा दें ! कोई भी व्यक्ति उस परिस्थिति में हमला नहीं कर सकता जब लिफ़्ट प्रत्येक मंजिल पर रुकती हो ! 

2. जब आप घर में अकेली हों और कोई अजनबी आप पर हमला करे तो क्या करें ? तुरन्त रसोईघर की ओर दौड़ जायें 

Police का कहना है: आप स्वयं ही जानती हैं कि रसोई में पिसी मिर्च या हल्दी कहाँ पर उपलब्ध है ! और कहाँ पर चक्की व प्लेट रखे हैं !यह सभी आपकी सुरक्षा के औज़ार का कार्य कर सकते हैं ! और भी नहीं तो प्लेट व बर्तनों को ज़ोर- जोर से फैंके भले ही टूटे !और चिल्लाना शुरु कर दो !स्मरण रखें कि शोरगुल ऐसे व्यक्तियों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है ! वह अपने आप को पकड़ा जाना कभी भी पसंद नहीं करेगा ! 

3. रात में ऑटो या टैक्सी से सफ़र करते समय ! 

Police का कहना है: ऑटो या टैक्सी में बैठते समय उसका नं० नोट करके अपने पारिवारिक सदस्यों या मित्र को मोबाईल पर उस भाषा में विवरण से तुरन्त सूचित करें जिसको कि ड्राइवर जानता हो ! मोबाइल पर यदि कोई बात नहीं हो पा रही हो या उत्तर न भी मिल रहा हो तो भी ऐसा ही प्रदर्शित करें कि आपकी बात हो रही है व गाड़ी का विवरण आपके परिवार/ मित्र को मिल चुका है ! . इससे ड्राईवर को आभास होगा कि उसकी गाड़ी का विवरण कोई व्यक्ति जानता है और यदि कोई दुस्साहस किया गया तो वह अविलम्ब पकड़ में आ जायेगा ! इस परिस्थिति में वह आपको सुरक्षित स्थिति में आपके घर पहुँचायेगा ! जिस व्यक्ति से ख़तरा होने की आशंका थी अब वह आपकी सुरक्षा का ध्यान रखेगा ! 

4. यदि ड्राईवर गाड़ी को उस गली/रास्ते पर मोड़ दे जहाँ जाना न हो और आपको महसूस हो कि आगे ख़तरा हो सकता है - तो क्या करें ? 

Police ्ञ का कहना है कि आप अपने पर्स के हैंडल या अपने दुपट्टा/ चुनरी का प्रयोग उसकी गर्दन पर लपेट कर अपनी तरफ़ पीछे खींचती हैं तो सैकिण्डो में वह व्यक्ति असहाय व निर्बल हो जायेगा ! यदि आपके पास पर्स या दुपट्टा न भी हो तो भी आप न घबरायें ! आप उसकी क़मीज़ के काल़र को पीछे से पकड़ कर खींचेंगी तो शर्ट का जो बटन लगाया हुआ है वह भी वही काम करेगा और आपको अपने बचाव का मौक़ा मिल जायेगा ! 

5. यदि रात में कोई आपका पीछा करता है ! 

Police का कहना है: किसी भी नज़दीकी खुली दुकान या घर में घुस कर उन्हें अपनी परेशानी बतायें ! यदि रात होने के कारण बन्द हों तो नज़दीक में एटीएम हो तो एटीएम बाक्स में घुस जायें क्योंकि वहाँ पर सीसीटीवी कैमरा लगे होते हैं ! पहचान उजागर होने के भय से किसी की भी आप पर वार करने की हिम्मत नहीं होगी ! 

आख़िरकार मानसिक रुप से जागरुक होना ही आपका आपके पास रहने वाला सबसे बड़ा हथियार सिद्ध होगा ! 

कृपया समस्त नारी शक्ति जिसका आपको ख़्याल है उन्हें न केवल बतायें बल्कि उन्हें जागरुक भी कीजिए ! अपनी नारी शक्ति की सुरक्षा के लिये ऐसा करना ! न केवल हम सभी का नैतिक उत्तरदायित्व है बल्कि कर्त्तव्य भी है ! 

प्रिय मित्रों इससे समस्त नारी शक्ति -अपनी माताश्री,बहन, पत्नी व महिला मित्रों को अवगत करावें !
       धन्यवाद !

Monday, 4 September 2017

Coins are now demonetized in India by Banks

सेवा में, 
            श्रीमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 
      (भारत सरकार,भारत)
                नई दिल्ली ,

विषय-1,2,5,10 के सिक्कों को किसी दुकानदार का न लेने के विषय में

महोदय 
           सादर पूर्वक आपको अवगत कराया जाता हैं कि पूरे देश में नोट बन्दी के बाद सिक्को की बाढ़ आन पड़ी हैं और एक छोटे से छोटे पान की दुकान पर 5000 हजार का सिक्का इक्कठा हो चूका हैं लेकिन कोई सिक्का लेने को तैयार नही हैं,जिसके पास सिक्के हैं वह बाजार में जाता हैं समान लेने तो दुकानदार सिक्के नही ले रहे हैं,पैकेट में पैसे होने पर भी वह बाजार से खाली हाथ लौटता हैं अपने जरूरत की समान वह नही घर ले पता ,इससे देश में एक प्रकार की भुखमरी फ़ैल रही हैं और महोदय दुकानदारों का दोष नही हैं क्यों ले वे सिक्के जब आपके बैंक सिक्के नही ले रहे तो दुकानदार क्यों ले सिक्के,यह किसी को छोटी समस्या लग रही हैं तो वह् गलत हैं यह देश की बहुत बड़ी समस्या हैं भारत की ग्रामीण जनता इस समस्या से परेशान हैं,अब आप ही सोचिए कि जिसके पास केवल सिक्के ही हो तो वह बेचारा का परिवार भूखे रहेगा तो आपका नारा सबका साथ सबका विकाश कहा तक सिद्ध हो पाता हैं ,आप रेडियो से अपने मन की बात कह तो लेते हैं कभी भी एक बार 125 करोड़ जनता की मन की बात सुन लिया कीजिए।मेरा एक छोटा सुझाव हैं आप ने देश को 12 बजे रात को संबोधित कर नोट बन्दी कर दिए कृपया आप फिर एक बार सिक्को को नोटों में चेंज करा दे।सिक्को का प्रचलन बन्द कर,1,2,5,10 के नोटों को ज्यादा प्रचलन करा दे तो आपका पुरे देश के 60%गरीब जनता आभारी रहेगा।

अतः 
      महोदय अगर मेरी बात सही हैं तो आप इसपर विचार करे और इसका समाधान कराए।

                              धन्यबाद।

      आपके देश का एक मजबूर       
                          देशवासी


फेसबुक,वाट्सअप,आदि सोसल मिडिया पर निरन्तर रहने वाले लोगो से गुजारिश है कि अगर यह समस्या आपको सही लगता हैं तो इसे शेयर करना नही भूले ,इसे इतना शेयर करे की हमारे देश के प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुचे।

Bakreed in islam

#मुल्लो के बच्चे बचपन मे #जानवरो कि गर्दन रेतना सीखते है |

हमारे बच्चे सिखते है भारत एक #धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है | यहॉ #हिन्दु #मुस्लिम #सिख #ईसाई आपस मे सब भाई भाई | #ईश्वर #अल्लाह तेरो नाम सब को संमती दे #भगवान |  #मजबह नही सिखाता आपस मे बैर रखना | 

अब सोचो आप इतनी #सेखुलर जड़ी बुटी घोल के पीने के बाद कैसे कोई सच्चा हिन्दु बनेगा | 

एक #गांधी हमे इतना भारी पड़ गया आज तो करोड़ो गांधी है |

बकरीद पर किसका 'बलिदान'

बकरीद पर किसका 'बलिदान'
आजतक के हल्ला बोल में उठा मुद्दा
     आज 1 सितंबर को शाम 5: 58 बजे आजतक के जाने-माने डिवेट "हल्ला बोल" में बकरीद के एक दिन पूर्व 'बकरे की 'बोटी' शीर्षक से जोरदार बहस हुई। डिवेट में मुस्लिम समुदाय की ओर से चार धर्म गुरु और बीजेपी की और से डॉ संबित पात्रा, विश्व हिन्दू परिषद के तिवारीजी और हिन्दू महासभा के प्रवक्ता शामिल हुए। पूरी डिवेट को मैंने बड़े ही गौर से देखा। आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने दोनों पक्षों पर अनेक तीखे सवाल दागे।
यह डिवेट इसलिए कि गयी थी क्योंकि बकरीद पर होने वाली बेजुबान पशुओं की कुर्बानी को संघ की विचारधारा ने सही नहीं माना था, उनका कहना है कि
-बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी न दी जाय, केक काटकर मनाएं बकरीद।
-बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी कुरीति है।
-बकरीद पर कुर्बानी वैसे ही हराम है जैसे तीन तलाक।
-होली, बकरीद की तरह बकरीद भी हो इको फ्रेंडली।
 इस डिवेट में बैठी जनता ने भी अनेक प्रश्न किये। एक युवती ने पूछा कि 'यह बलिदान का दिवस है, फिर इसमें किसने किसका बलिदान किया। बलिदान तो बकरे का हुआ। आपने क्या किया? इसके उत्तर में गरीब नवाज फॉउंडेशन के जाने माने प्रवक्ता अंसार रजा ने कहा कि पैसे का बलिदान किया। इस पर vhp के प्रवक्ता ने कहा यही पैसा आप गरीब, हॉस्पिटल, जरूरत मंद को बलिदान कर दें तो? इसका अंसार रजा कोई जबाब नहीं दे न ही उनके अन्य लोग।
एक दूसरी युवती ने पूछा कि जब हम इंसानों को जीने का हक है तो  मूक प्राणियों को क्यों नहीं? एक दूसरी लड़की ने प्रश्न किया कि जैसे कोर्ट ने तीन तलाक को कुरीति माना है उसी प्रकार बकरीद को भी कुरीति में आना चाहिए। एक अन्य युवती ने पूछा कि पशु प्रेम बकरीद के एक दिन पहले ही क्यों?
एक मुस्लिम गुरु जो अंजना ओम कश्यप के तीखे प्रश्न को झेल नहीं पाए और वो डिवेट बीच में छोड़कर चले गए, परन्तु डिवेट छोड़ने के पहले वह यह बता चुके थे कि हमारे यहां  'बकरीद' शब्द कहीं नहीं आया है। उनके यह कहने से स्पष्ट था कि "बकरे" को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। मुस्लिम धर्म गुरुओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इब्राहिम की परीक्षा लेते समय अल्लाह ने अपनी सबसे प्रिय वस्तु कुर्बान करने के लिए कहा था और इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी का फैसला लिया। इससे स्पष्ट था कि कहीं भी अल्लाह ने पशु या बकरे की बलि के लिए नहीं कहा। भला, बकरे का खून ही अल्लाहताला को प्रिये हो और वह उससे परितृप्त होता हो, यह क्या बात हुई।क्या सृष्टि की सर्वोत्तम शक्ति इतनी कमजोर है कि उसे बकरों के खून की तलब है? सिर्फ बकरे की कुर्बानी क्यों?
अब तो अनेक मुस्लिम मंच भी पशुओं की बलि के विरोध में आ गए हैं। मुस्लिम मंच के प्रमुख राजा रईस खान ने कुरान और हदीस साहब का हवाला देकर कहा , कहीं भी बकरीद पर किसी भी बेजुबान जानवर की कुर्बानी को हमारे पैगम्बर ने किसी जानवर की कोई कुर्बानी नहीं की है बल्कि रहमत बरती है।
मैं समझता हूं कि परमात्मा की राह में मैं-पने की व ममत्त्व की कुर्बानी जरूरी है, न कि किसी बकरे की। अहंकार और ममत्व का त्याग ही सच्ची कुर्बानी है।
आज की इस डिवेट मैं कोई भी बेजुबान पशुओं की बलि को सही सिद्ध नहीं कर पाया। बल्कि जब सच्चाई का सामना नहीं कर पाए तो एक प्रवक्ता डिवेट छोड़कर चले गए ।
जिस तरह दीपावली पर पर्यावरण को दृष्टि में रखते हुए पटाखे नहीं चलाने की अपील की जाती है, होली पर पानी की बचत के लिए गुलाल से होली खेलने की अपील की जाती है तो क्या बकरीद पर मूक पशुओं की कुर्बानी के बिना मनाने की अपील करना क्या कोई गुनाह है?
-डॉ सुनील संचय

Sunday, 3 September 2017

वो माँ है।

बर्तनों की आवाज़ देर रात तक आ रही थी...
रसोई का नल चल रहा है
माँ रसोई में है....

तीनों बहुऐं अपने-अपने कमरे में सोने जा चुकी....
माँ रसोई में है...

माँ का काम बकाया रह गया था
पर काम तो सबका था
पर माँ तो अब भी सबका काम अपना ही मानती है....

दूध गर्म करके
ठण्ड़ा करके
जावण देना है...
ताकि सुबह बेटों को ताजा दही मिल सके...

सिंक में रखे बर्तन माँ को कचोटते हैं
चाहे तारीख बदल जाये, सिंक साफ होना चाहिये....

बर्तनों की आवाज़ से 
बहू-बेटों की नींद खराब हो रही है
बड़ी बहू ने बड़े बेटे से कहा 
"तुम्हारी माँ को नींद नहीं आती क्या? ना खुद सोती है और ना ही हमें सोने देती है"

मंझली ने मंझले बेटे से कहा " अब देखना सुबह चार बजे फिर खटर-पटर चालू हो जायेगी, तुम्हारी माँ को चैन नहीं है क्या?"

छोटी ने छोटे बेटे से कहा " प्लीज़ जाकर ये ढ़ोंग बन्द करवाओ कि रात को सिंक खाली रहना चाहिये"

माँ अब तक बर्तन माँज चुकी थी ।
झुकी कमर
कठोर हथेलियां
लटकी सी त्वचा
जोड़ों में तकलीफ
आँख में पका मोतियाबिन्द
माथे पर टपकता पसीना
पैरों में उम्र की लड़खडाहट
मगर....
दूध का गर्म पतीला
वो आज भी अपने पल्लू  से उठा लेती है
और...
उसकी अंगुलियां जलती नहीं है, क्यों कि
वो माँ है ।

दूध ठण्ड़ा हो चुका...
जावण भी लग चुका...
घड़ी की सुईयां थक गई...
मगर...
माँ ने फ्रिज में से भिण्ड़ी निकाल ली
और...
काटने लगी
उसको नींद नहीं आती है, क्यों कि
वो माँ है ।

कभी-कभी सोचता हूं कि माँ जैसे विषय पर लिखना, बोलना, बनाना, बताना, जताना क़ानूनन  बन्द होना चाहिये....
क्यों कि यह विषय निर्विवाद है
क्यों कि यह रिश्ता स्वयं कसौटी है ।

रात के बारह बजे सुबह की भिण्ड़ी कट गई...
अचानक याद आया कि गोली तो ली ही नहीं...
बिस्तर पर तकिये के नीचे रखी थैली निकाली..
मूनलाईट की रोशनी में 
गोली के रंग के हिसाब से मुंह में रखी और 
गटक कर पानी पी लिया...

बगल में एक नींद ले चुके बाबूजी ने कहा " आ गई"
"हाँ, आज तो कोई काम ही नहीं था" 
माँ ने जवाब दिया ।

और... 
लेट गई, कल की चिन्ता में
पता नहीं नींद आती होगी या नहीं पर सुबह वो थकान रहित होती हैं, क्यों कि
वो माँ है ।

सुबह का अलार्म बाद में बजता है
माँ की नींद पहले खुलती है 
याद नहीं कि कभी भरी सर्दियों में भी
माँ गर्म पानी से नहायी हो
उन्हे सर्दी नहीं लगती, क्यों कि
वो माँ है ।

अखबार पढ़ती नहीं, मगर उठा कर लाती है
चाय पीती नहीं, मगर बना कर लाती है
जल्दी खाना खाती नहीं, मगर बना देती है....
क्यों कि वो माँ है ।

माँ पर बात जीवनभर खत्म ना होगी..
शेष अगली बार...

और हाँ, अगर पढ़ते पढ़ते आँखों में आँसु आ जाये तो कृपया खुलकर रोइये और आंसू पोछ कर एक बार अपनी माँ को जादू की झप्पी जरूर दीजिये,
क्योंकि वो किसी और की नही आपकी ही माँ है🙂😌 माँ।।

Thursday, 31 August 2017

Sadhu sant kaun hai

*साधु किसे कहते है ।*

*तरुण सागर जी महाराज ---*

   जिसके पेरौ मे जूता नही 
      सिर पर छाता नही 
      बेंक  मे खाता नही 
      परिवार से नाता नही 
      उसे कहते है  साधु ।

     जिसके तन पे कपडा नही 
       वचन मे लफड़ा नही
       मन मे क्षगडा नही 
       उसे कहते है साधु ।

     जिसका कोई घर नही 
        किसी बात का डर नही 
        दुनिया का असर नही 
        उसे कहते है  साधु ।

      जिसके पास बीबी नही 
        साथ टीवी नही 
        अमीरी गरीबी नही
        नाश्ते मे जलेबी नही 
        उसे कहते है  साधु ।

      जो कचचे पानी को छूता नही  
         बिसतर पर सोता नही 
         होटेल मे खाता नही 
         उसे कहते है साधु ।

      जिसे नाई की जररूत नही 
          जिसे तेली की जररूत नही 
          जिसे सुनार  की जररूत नही 
          जिसे लुहार  की जररूत नही 
          जिसे दर्जी  की जररूत नही 
          जिसे व्यापार  की जररूत नही 
          जिसे  धोबी की जररूत नही 
          फिर भी सबको धोता है 
          उसे कहते है  साधु ।

Wednesday, 30 August 2017

Always think positive

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये।

वहां पहुँचते  ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी।
उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी।

उसने दाये देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था।

मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ? 

क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?

हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा,शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा।और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।

*हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है।हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।*


कुछ लोग हमारी *सराहना* करेंगे,
कुछ लोग हमारी *आलोचना* करेंगे।

दोनों ही मामलों में हम *फायदे* में हैं,

एक हमें *प्रेरित* करेगा और
दूसरा हमारे भीतर *सुधार* लाएगा।।

       *अच्छा सोचें*

Sunday, 27 August 2017

About Dr. Kalam

दूरदर्शन के एक दक्षिण भारतीय भाषा के चैनल से श्री पी एम नायर जोकि एक सेवा निवर्त प्रसाशनिक अधिकारी है और वो पूर्व राष्ट्रपति स्व श्री ए पी जे कालाम साहब के निजी सचिव उस वक्त थे जब कालाम साहब देश के राष्ट्रपति थे।

उनके उस इंटरव्यू के दौरान  श्री नायर साहब ने जो कुछ भी कहा वो पूरी तरह से तो यहा नही पेश के पाऊंगा पर कुछ महत्व पूर्ण बिंदुओं को आपके सामने लाना चाहता हूं।

श्री नायर ने एक किताब भी लिखी है जिसका शीर्षक है *"कालाम इफ़ेक्ट"*

१. डॉ कालाम अपनी हर विदेश यात्रा में बहुमूल्य उपहार प्राप्त करते थे जो कि प्रथा अनुसार मेजबान देश के प्रमुख  मेहमान देश प्रमुख को उनके सम्मान स्वरूप देते है। 

उन उपहारों को प्राप्त करने से मना करना मेजबान देश का अपमान होगा अतः कालाम साहब उन उपहारों को धन्यवाद के साथ स्वीकार करते थे।

परंतु देश वापिस आते ही वो उन उपहारों के फोटो खिंचवाकर उनकी सूची तैयार करवाकर उन को राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय को सौप देते थे। फिर कभी भी उन उपहारों के बारे में पूछते भी नही थे।

कालाम साहब जब सेवा निवर्त हुए तो उन उपहारों से एक पेंसिल भी अपने साथ नही ले गए। सारे के सारे उपहार राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में रहे।

२.  २००२, ये वो साल है जब श्री कालाम भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए थे, रमजान जुलाई अगस्त के महीने में आया था।

इस अवसर पर इफ्तार की भोज को आयोजन करना राष्ट्रपति भवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी। 

डॉ कालाम ने श्री नायर को बुलाकर इस आयोजन पर आने वाले खर्च को पूछा और साथ मे पूछा कि वो क्यो इस इफ्तार भोज का आयोजन ऐसे व्यक्तियों के लिए करे जो स्वयम ही पहले से समर्थ है और प्रतिदिन अच्छा भोजन  प्राप्त करते है?

श्री नायर ने उन्हें बताया कि तकरीबन बाइस लाख रुपया उस इफ्तार भोज के आयोजन पर राष्ट्रपति भवन का खर्च होता था।

डॉ कालाम ने उन्हें आदेश दिया कि वो सारी रकम  को कुछ अनाथालयों में वस्त्र, भोजन और कम्बलों के रूप में दान की जाए।

उन्होंने अनाथालयों  का चुनाव करने के लिए एक टीम को जिम्मेदारी दी उस चुनाव के कार्य मे उन्होंने किसी भी प्रकार का दखल नही दिया।

जब टीम ने अनाथालयों की सूची तैयार कर ली तो कालाम साहब ने श्री नायर को अपने कमरे में बुला कर एक लाख रुपये का चेक, जो कि उनके निजी खाते से काटा हुआ था, दिया और कहा कि वो अपनी निजी बचत से ये थोड़ा सा धन दे रहे है जो अनाथलयो में दान किया जाए। उन्होंने साथ मे ये हिदायत दी कि उस चेक के बारे किसी को भी न बताया जाए।

श्री नायर ने उस इंटरव्यू में बताया कि वो कालाम साहब की उस हिदायत को सुनकर अचंभे में आ गये। उन्होंने कालाम साहब को कहा कि वो क्यो न सबको उस बात को बताये की इस देश के राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति है जो न केवल अपने अधिकार से जो खर्च कर सकते वो सारा धन, दान में देते है बल्कि खुद के निजी खाते से भी दान देते है

डॉ कालाम यद्यपि एक धार्मिक मुस्लिम थे, पर उनके कार्यकाल
में राष्ट्रपति भवन में इफ्तार का भोज का आयोजन नही हुआ।

३. डॉ कालाम को हा में हा मिलाने वाले लोग पसंद नही थे।

एक बार देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति महोदय से मुलाकात को पधारे थे और किसी विषय पर विचार विमर्श के दौरान डॉ कालाम ने एक बिंदु पर किसी बात पर अपने विचार प्रकट किए फिर उन्होंने नायर साहब से पूछा कि "क्या आप मेरी बात से सहमत है?"

"नही श्रीमान मैं आपकी बात से सहमत नही हूँ।" नायर साहब ने उनको जवाब दिया।

मुख्य न्यायाधीश महोदय को अपने कानों पर विश्वास नही हुआ कि एक सचिव की इतनी हिम्मत की वो राष्ट्रपति जी की बात से सहमत न हो और वो भी अन्य उपस्थित व्यक्तियों के समक्ष।

तब श्री नायर ने उन्हें बताया कि राष्ट्रपति जी उनसे पूछेगें की वो क्यो असहमत है और वो यदि मेरे कारण बताने के बाद यदि उन्हें मेरे बताये कारण सही लगे तो 99% ये बात सही है कि वो अपना निर्णय बदल देंगे।

४. एक बार उन्होंने अपने पचास रिस्तेदारो को दिल्ली बुलाया और उन्हें राष्ट्रपति भवन में ठहराया।

उन्होंने उनके दिल्ली दर्शन के लिए एक बस का प्रबंध करवाया और उस बस का किराया स्वयम के निजी खाते से वहन किया।
कोई भी सरकारी वाहन उन रिस्तेदारो के लाने लेजाने के लिए प्रयोग नही किया।

उन रिस्तेदारो के ठहरने के दौरान उन रिस्तेदारो के ऊपर जो भी खर्च उनको भोजन और ठहरने की व्यवस्था पर हुआ उसका पूरा हिसाब मांगा जो लगभग दौ लाख के आसपास हुआ। कालाम साहब ने वो सारा खर्च अपने निजी धन से वहन किया।

इस देश के इतिहास में उनसे पहले किसी ने भी ऐसा नही किया था।

अब आप एक और घटना को सुने।

डॉ कालाम के बड़े भाई उनके साथ उन्ही कमरे में पूरे एक सप्ताह रहे। ऐसा डॉ कालाम की इच्छा के अनुसार हुआ।

जब वो वापिस गए तो डॉ कालाम ने उनके रहने के दिनों का किराया भी देना चाहा।

जरा कल्पना कीजिये कि कोई राष्ट्रपति अपने रहने के कमरे का भी किराया देना चाहता था।

ये वैसे राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों ने नही माना और सबने सोचा कि ये तो ईमानदारी की परकाष्ठा थी।

५.  जब राष्ट्रपति कालाम साहब का कार्यकाल पूरा हुआ तब राष्ट्रपति भवन के सभी कर्मचारी अपने परिवार सहित उनके सम्मानार्थ उनसे भेंट करने गए।

श्री नायर उनसे मिलने अकेले गए तो कालाम साहब ने उनके परिवार के बारे में पूछा तब उन्हें पता चला की नायर साहब की पत्नी एक दुर्घटना के कारण पांव की हड्डी टूटने की वजह से चल नही पा रही थी और घर पर थी।

अगले दिन सुबह श्री नायर ने देखा कि बहुत से पुलिस वाले उनके घर के बाहर खड़े थे तो उन्होंने उसका कारण पूछा तो पता चला कि राष्ट्रपति महोदय स्वयम ही उनके घर आ रहे थे। कालाम साहब श्री नायर के घर जाकर उनकी पत्नी से मिले उनका हाल चाल पूछा और कुछ समय भी बिताया।

श्री नायर ने बताया कि कोई भी राष्ट्रपति अपने सचिव के घर कभी भी नही जाएगा और वो भी इतने साधारण वजह के लिए।

मेरे मित्र ने सोचा कि वो हमें ज्यादा से ज्यादा उस प्रसारित इंटरव्यू की बाते हमको बताये क्योकि वो दक्षिण भाषा के दूरदर्शन चेनल से प्रसारित हुआ था जिसे शायद ही किसी ने इस देश के भाग में देखा हो। इसलिए ये उस इंटरव्यू की बाते मुझे इंग्लिश भाषा मे भेजी उसे मैने सब की जानकारी के लिए हिंदी भाषा मे रूपान्तरित किया है।

हा एक बात और जो उस इंटरव्यू के दौरान पता चली की कालाम साहब के छोटे भाई एक छतरी की मरम्मत करने की दुकान चलाते है।  श्री नायर उनसे जब श्री कालाम साहब के अंतिम संस्कार के दौरान मिले तो उन्होंने श्री नायर के पांव छू लिए जोकि उनकी अपने बड़े भाई कालाम साहब और श्री नायर के प्रति श्रद्धा का प्रतीक था।

ये कुछ ऐसी बाते है जिनका प्रसार जन जन के बीच हो ताकि इनसे प्रेरणा लेकर शायद कुछ और कालाम इस पवित्र धरती पर पैदा हो। 

व्यवसायी प्रसार के साधन शायद ही इन बातों को प्रसारित करे क्योकि इन बातों की टेलिविज़न रेटिंग पॉइंट यानी टीआरपी कीमत नही है। 

कृपया आप इसे अवश्य ज्यादा से ज्यादा आगे इसे प्रसारित करे ताकि संसार को इस विभूति के बारे में ज्यादा से ज्यादा पता चले।

Friday, 25 August 2017

Gurmeet Ram Raheem

गुरमीत राम रहीम पर उनके ही डेरे की एक साध्‍वी ने 2002 में रेप के सनसनीखेज आरोप लगाते हुए तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी और हाईकोर्ट को पत्र लिखा था. इसमें उसने कहा था कि किस तरह राम रहीम ने उसके और उसकी जैसी दूसरी साध्वियों के साथ बलात्‍कार किया. अलग अलग मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आई खबरों के अनुसार, साध्‍वी का कहना है कि डेरे में उसका तीन साल तक शोषण किया गया. कई साध्वियों ने तो हालात से समझौता कर लिया, लेकिन उसने इस पाप के खिलाफ आवाज उठाने की सोची. साध्‍वी के अनुसार, उसने इसके बारे में अपने परिवार को भी बताया, लेकिन कोई बात नहीं बनीं. बल्कि परिवार ने गुरमीत  को भगवान बता दिया. पढ़ि‍ए उस साध्‍वी ने अपने पत्र में राम रहीम के किन किन कुकर्मों का खुलासा किया था...

श्रीमान जी मैं पंजाब की रहने वाली लड़की हूं. पांच साल से डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा में साधु लड़की के रूप में काम कर रही हूं. मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 16 से 18 घंटे तक सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा यौनिक शोषण (बलात्‍कार) किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्‍य महाराज के श्रद्धालु हैं. जिनकी प्रेरणा से साधु बनी थी. साधु बनने के दो तीन साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत राम रहीम की खास साधु गुरुजोत ने रात 10 बजे मुझे बताया कि मुझे महाराज जी ने गुफा में बुलाया है. 

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हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, साध्‍वी ने कहा- मैं पहली बार वहां जा रही थी. बहुत खुश थी, मुझे लग रहा था खुद परमात्‍मा ने बुलाया है. अंदर जाकर मैंने देखा कि महाराज बैड पर बैठे हैं. वहां पर टीवी पर एक पोर्न फि‍ल्‍म चल रही है.  वहां पहुंचते ही महाराज ने मुझे बाहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्‍हारे साथ प्‍यार करना चाहते हैं, क्‍योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्‍त तन मन धन सब सतगुरु को अर्पण करने को कहा था तो अब ये तन मन हमारा है. महाराज मेरे साथ जबर्दस्‍ती कर रहे थे. मैंने विरोध किया तो उन्‍होंने कहा- इसमें कोई शक नहीं कि हम ही खुदा हैं. जब मैंने उनसे कहा कि क्‍या खुदा ये काम करता है, तो उन्‍होंने कहा श्रीकृष्‍ण भगवान थे. उनके यहां 360 गोपियां थीं. जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे. फि‍र भी लोग उन्‍हें परमात्‍मा मानते हैं. ये कोई नई बात नहीं है. अगर हम चाहें तो तुम्‍हारी जान लेकर तुम्‍हारा दाह संस्‍कार कर सकते हैं. तुम्‍हारे घर वाले हर प्रकार से हम पर विश्‍वास करते हैं और हमारे गुलाम हैं. वो मुझसे बाहर नहीं जा सकते. ये तुम्‍हें भी अच्‍छी तरह पता है. इसके बाद गुरमीत ने मेरे साथ बलात्‍कार किया. ये सिलसिला तीन साल तक चला. 

इंडियन एक्‍सप्रेस की खबरों के अनुसार, गुरमीत ने साध्‍वी से आगे कहा- हमारी सरकार में बहुत चलती है. हरियाणा और पंजाब के मुख्‍यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनेता हमसे समर्थन लेते हैं. पैसा लेते हैं. और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्‍हारे परिवार से नौकरी लगे सदस्‍यों को बर्खास्‍त करा देंगे. सभी सदस्‍यों को मरवा देंगे और कोई सबूत भी नहीं छोड़ेंगे. ये तुझे अच्‍छी तरह से पता है. हमने गुंडों से डेरे के मैनेजर को भी मरवा दिया था और आज तक इसके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता. न ही इसके कोई सबूत हैं. क्‍योंकि पैसों के बल पर हम राजनेताओं, पुलिस और न्‍याय को खरीद लेंगे. इसके बाद महाराज ने मेरे साथ बलात्‍कार किया और पिछले तीन सालों से वो लगातार मेरे साथ बलात्‍कार करता आ रहा है. 

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आज मुझे पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं. उनके साथ भी ये बलात्‍कार कर चुका है. डेरे में मौजूद 35 से 40 साधु लड़कियां 40 से अधिक उम्र की हैं. जिनकी शादी की उम्र निकल चुकी है. उन्‍होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया. इसमें से ज्‍यादातर बीए, एमए, बीएड पास हैं. घरवालों के कट्टर अंधविश्‍वास होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं. हमें सफेद कपड़े पहना, सिर पर चुन्‍नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख ना उठाकर देखना, आदमी से पांच दस फुट की दूरी पर रहना, ऐसा महाराज का आदेश था. हम दिखाने के लिए देवी हैं मगर हमारी हालत वैश्‍याओं जैसी है. 

जब मैंने अपने घरवालों से इस बारे में बात की तो वह मुझसे गुस्‍से में कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरण किया कर. मैं मजबूर हूं यहां सतगुरु के  आदेश मानने पड़ते हैं. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं. घर पर फोन पर बात नहीं कर सकतीं. यदि कोई लड़की आवाज उठाती है तो बाबा का आदेश है कि उनका मुंह बंद कर दो. 

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संगरूर जिले की एक लड़की ने जब सच कहना चाहा तो डेरे के गुंडों ने उसे प्रताडि़त किया जाए. मैं मरना नहीं चाहती डेरे की सच्‍चाई सामने लाना चाहती हूं. मैं चाहती हूं कि मेरा मेडिकल कराया जाए. उससे पता चल जाएगा कि हमारे साथ किसने गलत किए. इसके बाद वाजपेयी सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. 2008 में सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राम रहीम ने कई साध्वियों के साथ बलात्‍कार किया. इसके अलावा उन्‍हें धमकियां भी दीं.