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Tuesday, 13 October 2015

एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था।

एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था।  - उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क्रोध आए
वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे। पहले दिन लड़के ने पेड़ में
30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसे अपने क्रोध पर धीरे-धीरे नियंत्रण
करना आ गया। अब वह पेड़ में प्रतिदिन इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था।
उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर
नियंत्रण करना आसान था। एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक
भी कील नहीं ठोंकी। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे
कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे। लड़के ने बड़ी मेहनत करके
जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम
पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास
लेकर गया। पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा – "तुमने बहुत अच्छा काम
किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो।
अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब
इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे। अगर तुम किसी के पेट में
छुरा घोंपकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी घाव का निशान वहां
हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा कृत्य न करो
जिसके लिए तुम्हें सदैव पछताना पड़े…!!

🌞Good morning🌞

मंजिल चाहे कितनी भी
   ऊँची क्यों न हो
रास्ते हमेशा
  पैरों के नीचे होते हैं!
जो निखर कर बिखर जाए
   वो "कर्तव्य" है और...
जो बिखर कर निखर जाए
    वो "व्यक्तित्व" है!!!
🌞Good morning🌞
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dedicated to all daughter

बहोत दिनों बाद एक अच्छा मेसेज आया है।
सब से अर्जी है की अपने सभी परिजनों को फारवर्ड करें 🙏
पिता बेटी के सर पर हाथ रख कर बोला- मैं तेरे लिए ऐसा पति खोज कर लाऊंगा जो तुझे बहुत प्यार करे ,तेरी भवनाओं का सम्मान करे ,तेरे दुख सुख को समझ सके ,तेरी आँखो में आँसू न आने दे,तेरी हर छोटी छोटी ख्वाइशों को पूरा कर सके।
बेटी ने पूछा क्यो पापा- पिता बोला बेटा हर बाप का सपना होता है की उसकी बेटी को राजकुमार जैसा पति मिले जो उसे बहुत प्यार दे और उसे हमेशा सुखी रखे।
बेटी-तो पापा नाना जी ने भी आपको मम्मी का हाथ यही सोचकर दिया होगा न की आप भी राजकुमार हो। फिर आप मम्मी को हमेशा क्यो रुलाते हो कही बाहर भी नही ले जाते और प्यार भी नही करते और हमेशा चिल्लाते रहते हो तो क्या आप अच्छे वाले राजकुमार नही निकले।
ये सुन पिता को एहसास हुआ की मुझे भी किसी ने राजकुमार समझ कर अपने कलेजे का टुकड़ा दिया और मैं खुद तो राजकुमार बना रहा पर अपनी पत्नी को कभी राजकुमारी नही समझा।
आज खुद बाप बंनने के बाद एह्सास हुआ ।की अपने दिल के टुकड़े को सही हाथ मे नही सौपा तो उसके दिल के टुकड़े हो जायेगे।जो कोई भी बाप नही सहेगा।
इसलिए जैसा आप अपनी बेटी के लिए सोचते है ।वैसा ही अपनी पत्नी के लिए सोचिये। आखिर वो भी किसी की बेटी है किसी का आँख का तारा है।उसे दुख होगा तो उसके पिता को भी दुख होगा।क्रप्या कर अपनी घर की औरतों को भी इज़्ज़त और प्यार दीजिए वो भी किसी की बेटी है।
😊👭dedicated to all daughter👩

जीवन क्या है

जीवन क्या है
😊यदि जीवन प्रश्न है तो हल करो
😊यदि जीवन ईश्वर तो पूजा करो
😊यदि जीवन स्वप्न है तो साकार करो,
😊यदि जीवन चुनौती है तो स्वीकार करो
😊यदि जीवन अवसर है तो लाभ उठाओ
😊यदि जीवन नाव है तो पार लगाओ
😊यदि जीवन गुत्थी है तो उसे सुलझाओ
😊यदि जीवन खेल है तो उसे जमकर खेलो
😊यदि जीवन कष्ट है तो साहस से झेलो
😊यदि जीवन दुःख-सुख का मेल है तो हँसकर सह लो
😊यदि जीवन गीत है तो उसे प्रेम से गाओ
😊यदि जीवन पुस्तक है तो पढो मनोयोग से
😊यदि जीवन विषय है तो अमृत करो शोध से
😊यदि जीवन सन्देश है तो उसे फैलाओ वेग से
😊😊😊😊😊😊😊
इस संसार में सबसे बड़ी सम्पत्ति
"बुद्धि "
सबसे अच्छा हथियार
"धेर्य"
सबसे अच्छी सुरक्षा
"विश्वास"
सबसे बढ़िया दवा
"हँसी"
और आश्चर्य की बात कि
"ये सब निशुल्क हैं  💐💎 जीवन मंत्र  💎💐
१) धीरे बोलिये    👉 शांति मिलेगी
२) अहम छोडिये  👉 बड़े बनेंगे
३) भक्ति कीजिए   👉 मुक्ति मिलेगी
४) विचार कीजिए  👉 ज्ञान मिलेगा
५) सेवा कीजिए    👉 शक्ति मिलेगी
६) सहन कीजिए   👉 देवत्व मिलेगा
७) संतोषी बनिए   👉 सुख मिलेगा.         👦"इतना छोटा कद रखिए कि सभी आपके साथ बैठ सकें और इतना बडा मन रखिए कि जब आप खडे हो जाऐं तो कोई बैठा न रह सके"
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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लौकिक सुखों से परे सच्चा सुख

लौकिक सुखों से परे सच्चा सुख
एक गाँव के मंदिर में एक बह्मचारी रहता था। लोभ,मोह से परे अपने आप में मस्त रहना उसका स्वभाव था। कभी-कभी वह यह विचार भी करता था कि इस दुनिया में सर्वाधिक सुखी कौन है? एक दिन एक रईस उस मंदिर में दर्शन हेतु आया। उसके मंहगे वस्त्र,आभूषण,नौकर-चाकर आदि देखकर बह्मचारी को लगा कि यह बड़ा सुखी आदमी होना चाहिए। उसने उस रईस से पूछ ही लिया। रईस बोला-मैं कहाँ सुखी हूँ भैया! मेरे विवाह को  ग्यारह वर्ष हो गए,किन्तु आज तक मुझे संतान सुख नहीं मिला। मैं तो इसी चिंता में घुलता रहता हूँ कि मेरे बाद मेरी सम्पति का वारिस कौन होगा और कौन मेरे वंश के नाम को आगे बढ़ाएगा? पड़ोस के गांव में एक विद्वान पंडित रहते हैं। मेरी दृष्टि में वे ही सच्चे सुखी हैं।
ब्रह्मचारी विद्वान पंडित से मिला,तो उसने कहा-मुझे कोई सुख नहीं है बंधु,रात-दिन परिश्रम कर मैंने विद्यार्जन किया,किन्तु उसी विद्या के बल पर मुझे भरपेट भोजन भी नहीं मिलता। अमुक गांव में जो नेताजी रहते हैं,वे यशस्वी होने के साथ-साथ लक्ष्मीवान भी है। वे तो सर्वाधिक सुखी होंगे। ब्रह्मचारी उस नेता के पास गया,तो नेताजी बोले-मुझे सुख कैसे मिले? मेरे पास सब कुछ है,किन्तु लोग मेरी बड़ी निंदा करते हैं। मैं कुछ अच्छा भी करूँ तो उसमें बुराई खोज लेते हैं। यह मुझे सहन नहीं होता। यहां से चार गांव छोड़कर एक गांव के मंदिर में एक मस्तमौला ब्रह्मचारी रहता है। इस दुनिया में उससे सुखी और कोई नहीं हो सकता। ब्रह्मचारी अपना ही वर्णन सुनकर लज्जित हुआ और वापिस मंदिर में लौटकर पहले की तरह सुख से रहने लगा। उसे समझ में आ गया कि सच्चा सुख लौकिक सुखों में नहीं है बल्कि वह तो लौकिक चिंताओं से मुक्त अलौकिक की निः स्वार्थ उपासना में बसता है। समस्त भौतिकता से परे आत्मिकता को पा लेना ही सच्चे सुख व आनंद की अनुभूति कराता है।
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Thursday, 8 October 2015

मनुष्य होना मेरा भाग्य हैं

👌मनुष्य होना मेरा भाग्य हैं,

पर आप सब से जुड़े रहना मेरा सौभाग्य है.👌

🙏जय श्री कृष्णा🙏

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Thursday, 6 August 2015

हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क :

✅एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..?
वैज्ञानिक कारण हैं..!
एक दिन डिस्कवरी पर जेनेटिक
बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम
देख रहा था ...
उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है
"सेपरेशन ऑफ़ जींस"
मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नही करना चाहिए ..क्योकि नजदीकी
रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता और जींस लिंकेज्ड
बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और
एल्बोनिज्म होने की १००% चांस होती है ..
फिर मुझे
बहुत ख़ुशी हुई जब उसी कार्यक्रम में ये
दिखाया गया की आखिर हिन्दूधर्म में
हजारों सालों पहले जींस और डीएनए के बारे में
कैसे
लिखा गया है ? हिंदुत्व में कुल सात गोत्र होते
है
और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नही कर
सकते
ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहे.. उस वैज्ञानिक ने
कहा की आज पूरे विश्व
को मानना पड़ेगा की हिन्दूधर्म ही विश्व का
एकमात्र
ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है !
हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क:
1- कान छिदवाने की परम्परा:
भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।
2-: माथे पर कुमकुम/तिलक
महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं।
वैज्ञानिक तर्क- आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता
3- : जमीन पर बैठकर भोजन
भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है।
वैज्ञानिक तर्क- पलती मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।
4- : हाथ जोड़कर नमस्ते करना
जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं।
वैज्ञानिक तर्क- जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।
5-: भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से
जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है।
वैज्ञानिक तर्क- तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है।
6-: पीपल की पूजा
तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं।
वैज्ञानिक तर्क- इसकी पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता ह
7-: दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें।
वैज्ञानिक तर्क- जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है।
8-सूर्य नमस्कार
हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क- पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।
9-सिर पर चोटी
हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क- जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।
10-व्रत रखना
कोई भी पूजा-पाठ या त्योहार होता है, तो लोग व्रत रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क- आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते।
11-चरण स्पर्श करना
हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें, तो उसके चरण स्पर्श करें। यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं, ताकि वे बड़ों का आदर करें।
वैज्ञानिक तर्क- मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है। इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं। इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है, या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक।
12-क्यों लगाया जाता है सिंदूर
शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं।
वैज्ञानिक तर्क- सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। चूंकि इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं, इसीलिये विधवा औरतों के लिये सिंदूर लगाना वर्जित है। इससे स्ट्रेस कम होता है।
13- तुलसी के पेड़ की पूजा
तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है।
वैज्ञानिक तर्क- तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।
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दिल की हसरत अब जुबाँ पर आने लगी है

॥ मेरे कन्हैया ॥
॥ दिल की हसरत अब जुबाँ पर आने लगी है ॥
॥ और तुम्हें देखकर तो मेरी जिंदगी मुस्कुराने लगी है ॥
॥ ये प्रेम की इंतहाँ है या मेरी दीवानगी मेरे श्याम ॥
॥ कि हर सूरत में तेरी सूरत नजर आने लगी है ॥
॥ जय जय श्री राधे-कृष्णा ॥
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Those who are willing to help you.

A lovely little girl was holding two apples with both hands.
Her mum came in and softly asked her little daughter with a smile; my sweetie, could you give your mum one of your two apples?
The girl looked up at her mum for some seconds, then she suddenly took a quick bite on one apple, and then quickly on the other.
The mum felt the smile on her face freeze. She tried hard not to reveal her disappointment.
Then the little girl handed one of her bitten apples to her mum,and said: mummy, here you are. This is the sweeter one.
No matter who you are, how experienced you are, and how knowledgeable you think you are, always delay judgement. 
Give others the privilege to explain themselves.   
                           
What you see may not be the reality. Never conclude for others.
Which is why we should never only focus on the surface and judge others without understanding them first.
Those who like to pay the bill, do so not because they are loaded but because they value friendship above money.
Those who take the initiative at work, do so not because they are stupid but because they understand the concept of responsibility.
Those who apologizes first after a fight, do so not because they are wrong but because they value the people around them.
Those who are willing to help you, do so not because they owe you any thing but because they see you as a true friend.
Those who often text you, do so not because they have nothing better to do but because you are in their heart.
Those who take out time to chat with you, does not mean they are jobless or less busy, but they know the importance of keeping in touch.
One day, all of us will get  separated  from each other; we will miss our conversations of everything & nothing; the dreams that we had.
Days will pass by, months, years, until this contact becomes rare... One day our children will see our pictures and ask 'Who are these people?' And we will smile with invisible tears  because a heart is touched with a strong word and you will say: 'IT WAS THEM THAT I HAD THE BEST DAYS OF MY LIFE WITH'.

Monday, 3 August 2015

शिव जी के पवित्र श्रावण महीने के आगमन की आपको और आपके पूरे परिवार को मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये।

ॐ नमः शिवायः

शिव जी के पवित्र श्रावण
महीने के आगमन की आपको और आपके पूरे परिवार को मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये।
भगवान् भोले नाथ आपकी जिंदगी खुशियों से भर दें।

हर हर महादेव।।

Sunday, 2 August 2015

ॐ नमः शिवायः

ॐ नमः शिवायः शिव जी के पवित्र श्रावण

महीने के आगमन की आपको और आपके पूरे परिवार को मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये।

भगवान् भोले नाथ आपकी जिंदगी खुशियों से भर दें।

हर हर महादेव।।

Saturday, 1 August 2015

🌹श्री हरि कहते है🌹

🌹श्री हरि कहते है🌹


जब तक आप खुद पे विश्वास  नहीं करते

तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते

🌹जय श्री हरि🌹

.... हे प्रभु श्री कृष्ण .......

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ना रईस हूँ , ना अमीर हूँ ...
न मैं बादशाह हूँ ना वजीर हूँ ...
.................... हे प्रभु श्री कृष्ण ..................
तेरा इश्क है मेरी सल्तनत ,
मैं उसी सल्तनत का फ़क़ीर हूँ .......
खूबसूरत है वो लब ........ जिन पर ,
केवल श्री कृष्ण नाम ......की चर्चा है !!
खूबसूरत है ............ वो दिल जो ,
केवल श्री कृष्ण के लिये धडकता है !!
खूबसूरत है वो जज़बात जो ,
श्री कृष्ण संग की भावनाओं को समझ जाए !!
खूबसूरत है.....वो एहसास जिस में ,
श्री कृष्ण प्रेम ......की मिठास हो जाए !!
खूबसूरत हैं ....... वो बाते जिनमे ,
श्री कृष्ण ......... की बाते शमिल हो !!
खूबसूरत है.......वो आँखे जिनमें ,
श्री कृष्ण के ..... दर्शन की प्यास है !!
खूबसूरत है .... वो हाथ जो
श्री कृष्ण की सेवा में लगे रहते है !!
खूबसूरत है........... वो सोच जिसमें ,केवल श्री कृष्ण की ही सोच हो !!
खूबसूरत हैं .......... वो पैर जो ,
दिन रात केवल प्यारे श्री कृष्ण की तरफ बढ़ते है !!
खूबसूरत हैं ...... वो आसूँ ,
जो केवल प्यारे श्री कृष्ण के लिये बहते हैं !!
खुबसुरत हैं ....... वो कान ,
जो श्री कृष्ण नाम का गुणगान सुनते है !!
खुबसुरत है वो शीश ........ जो
श्री कृष्ण के चरणों में नमन को झुकता है
👏👏👏
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Friday, 31 July 2015

What is Guru Purnuma.

गुरु पूर्णिमा ??
गुरु के प्रति आभार का दिन ......
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु : गुरु देवों महेश्वरः !
गुरु साक्षात् परब्रम्हा तस्मे श्री गुरुये नमः !!
भारतीय संस्कृति में अनादि काल से ही गुरु को विशेष दर्जा प्राप्त है ! गुरु की महानता का परिचय सन्त कबीर ने बहुत अच्छे से इस दोहे में दिया है !
गुरु गोबिन्द दोउ खड़े काके लागु पाए !
बलिहारी गुरु आपके जो गोबिन्द दियो मिलाय !!
गुरु शब्द का महत्व तो गुरु शब्द से ही निमित है संस्कृत में " गू " का अर्थ है अन्धकार ( अज्ञान ) और
" रु " का अर्थ है हटाने वाला यानि प्रकाश ....गुरु का अर्थ है अन्धकार को हटाने वाला , माता पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु है ! जो हमारा पालन पोषण करते है हमे बोलना सिखाते है ! तथा वो सभी संस्कार देते है ! जिनके द्वारा हम समाज में रहने योग्य बनते है उसके आगे जीवन में सार्थकता प्रदान करने के लिए जिस ज्ञान एवं शिक्षा की आवश्यकता होती है वह गुरु से प्राप्त होती है !!
आषाढ़ मॉस की पूर्णिमा का दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है ! हिन्दू धर्म में इस का विशेष महत्व है हिन्दू धर्म गर्न्थो के अनुसार इस दिन महाऋषि वेद व्यासः जी का जन्म हुआ था उन्होंने 18 पुराणों एवम् 18 उपमहापुराणो की रचना की थी ! गुरु जो स्वम् पूर्ण होते है ! जो पूर्ण है वही पूर्णत्व की प्राप्ति दुसरो को करा सकते है ! पूर्णिमा के चंद्रमा की भांति जिसके जीवन में प्रकाश है ! वही तो अपने शिष्यो के अन्तःकरण में ज्ञान रूपी चन्दर की किरणे बिखेर सकता है ! गुरु वहीँ जो हमारे जीवन को सही राह पर ले आये ! गुरु हमारे भीतर संस्कारो का सर्जन करता है और दुर्भवनाओ का विनाश करता है अतः गुरु पूर्णिमा सदगुरु के पूजन का पर्व है ! यह किसी व्यक्ति की पूजा नही अपितु ज्ञान का आदर है ज्ञान का पूजन है !!!
वर्तमान युग में गुरु और शिष्य की परम्परा में कुछ विसंगतियां आ गयी है यह जरुरी नही देह धारी गुरु को माना जाये ! मन में सच्ची लगन और श्रद्धा हो तो गुरु को कही भी पाया जा सकता है ! एकलव्य ने मिटटी की प्रतिमा बना कर गुरु को अपने भीतर जागृत किया और एक महान धनुर्धर बना , दातेत्र ने 24 गुरु बनाये यानि 24 जगह से ज्ञान प्राप्त किया ! उन्होंने संसार में मौजूद हर उस वनस्पति प्राणी ग्रह नक्षत्र को अपना गुरु बनाया जिससे कुछ सिख जा सके !!!!!
गुरु पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक बधाई ......

तेरा ऐसा भी क्या रिश्ता है,

हे प्रभु.....,

तेरा ऐसा भी क्या रिश्ता है,

दर्द कोई भी हो,

याद तेरी ही आती है |||

🙏

गुरुपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ ..!

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः ।
गुरुःसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
🙏
गुरुपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ  ..!!!🙏🙏

गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाये

गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाये
*********************
गुरुपूर्णिमा" है ..और हम सब के कोई न कोई गुरु अवश्य होते है जीवन में ..चाहे वो ईश्वर के रूप में हो , या स्कूल केअध्यापक  के रूप में हो या फिर हमारे माता -पिता ही क्यों न हो ...कभी कभी आश्चर्यजनक रूप से  ,हमारे मित्र, हमारे भाई - बहन  , हमारे बच्चे , हमारे प्रेमी -- प्रेमिकाये भी गुरु के रूप में हमें कोई न कोई जीवन का मन्त्र दे जाते है ..तो आईये , हम इस पावन दिन को अपने अपने तरीके से अपने "गुरू जी"को को एक छोटा  सा धन्यवाद  बोल कर मनाये ,
"गुरूजी"आपके जीवन को सुखी बनाये , आप सब को प्रसन्न रखे , आपके घर, बच्चे, दोस्तों और रिश्तेदारों को खुश रखे ..आप "गुरूजी"की भक्ति में डूबकर परमानंद को प्राप्त करे.. .आप सबको गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाये !!!
ॐ नमः शिवाय, शिवजी सदा सहाय
ॐ नमः शिवाय, गुरूजी सदा सहाय
     🙏🌹 जय गुरूजी
🌹🙏

कल रात मैंने एक "सपना" देखा.!!

✅"मेरा सपना..!!!''
कल रात मैंने एक
"सपना"  देखा.!!
सपने में....
मैं और मेरी Family
शिमला घूमने गए..!
हम सब
शिमला की रंगीन वादियों में
कुदरती नजारा देख रहे थे..!
जैसे ही हमारी Car
Sunset Point की ओर
निकली...
अचानक गाडी के
Breakफेल हो गए
और हम सब
करीबन 1500 फिट
गहरी खाई में जा गिरे..!
मेरी तो
on the spot Death
हो गई....
जीवन में कुछ अच्छे कर्म किये होंगे
इसलिये यमराज मुझे
स्वर्ग में ले गये...
देवराज इंद्र ने
मुस्कुराकर
मेरा स्वागत किया...
मेरे हाथ में
Bag देखकर पूछने लगे
''इसमें क्या है..?"
मैंने कहा...
'' इसमें मेरे जीवन भर की कमाई है, पांच करोड़ रूपये हैं ।"
इन्द्र ने
'BRP-16011966'
नम्बर के Locker की ओर
इशारा करते हुए कहा-
''आपकी अमानत इसमें रख
दीजिये..!''
मैंने Bag रख दी...
मुझे एक Room भी दिया...
मैं Fresh होकर
Market में निकला...
देवलोक के
Shopping मॉल मे
अदभूत वस्तुएं देखकर
मेरा मन ललचा गया..!
मैंने कुछ चीजें पसन्द करके
Basket में डाली,
और काउंटर पर जाकर
उन्हें हजार हजार के
करारे नोटें देने लगा...
Manager ने
नोटों को देखकर कहा,
''यह करेंसी यहाँ नहीं चलती..!''
यह सुनकर
मैं हैरान रह गया..!
मैंने इंद्र के पास
Complaint की
इंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि,
''आप व्यापारी होकर
इतना भी नहीं जानते..?
कि आपकी करेंसी
बाजु के मुल्क
पाकिस्तान,
श्रीलंका
और बांगलादेश में भी
नही चलती...
और आप
मृत्यूलोक की करेंसी
स्वर्गलोक में चलाने की
मूर्खता कर रहे हो..?''
यह सब सुनकर
मुझे मानो साँप सूंघ गया..!
मैं जोर जोर से दहाड़े मारकर
रोने लगा.
और परमात्मा से
दरखास्त करने लगा,
''हे भगवान्.ये...
क्या हो गया.?''
''मैंने कितनी मेहनत से
ये पैसा कमाया..!''
''दिन नही देखा,
रात नही देखा,"
'' पैसा कमाया...!''
''माँ बाप की सेवा नही की,
पैसा कमाया,
बच्चों की परवरीश नही की,
पैसा कमाया....
पत्नी की सेहत की ओर
ध्यान नही दिया,
पैसा कमाया...!''
''रिश्तेदार,
भाईबन्द,
परिवार और
यार दोस्तों से भी
किसी तरह की
हमदर्दी न रखते हुए
पैसा कमाया.!!"
''जीवन भर हाय पैसा
हाय पैसा किया...!
ना चैन से सोया,
ना चैन से खाया...
बस,
जिंदगी भर पैसा कमाया.!''
''और यह सब
व्यर्थ गया..?''
''हाय राम,
अब क्या होगा..!''
इंद्र ने कहा,-
''रोने से
कुछ हासिल होने वाला
नहीं है.!! "
"जिन जिन लोगो ने
यहाँ जितना भी पैसा लाया,
सब रद्दी हो गया।"
"जमशेद जी टाटा के
55 हजार करोड़ रूपये,
बिरला जी के
47 हजार करोड़ रूपये,
धीरू भाई अम्बानी के
29 हजार करोड़
अमेरिकन डॉलर...!
  सबका पैसा यहां पड़ा है...!"
मैंने इंद्र से पूछा-
"फिर यहां पर
कौनसी करेंसी
चलती है..?"
इंद्र ने कहा-
"धरती पर अगर
कुछ अच्छे कर्म
किये है...!
जैसे किसी दुखियारे को
मदद की,
किसी रोते हुए को
हसाया,
किसी गरीब बच्ची की
शादी कर दी,
किसी अनाथ बच्चे को
पढ़ा लिखा कर
काबिल बनाया...!
किसी को
व्यसनमुक्त किया...!
किसी अपंग स्कुल, वृद्धाश्रम या
मंदिरों में दान धर्म किया...!"
"ऐसे पूण्य कर्म करने वालों को
यहाँ पर एक Credit Card
मिलता है...!
और
उसे वापर कर आप यहाँ
स्वर्गीय सुख का उपभोग ले
सकते है..!''
मैंने कहा,
"भगवन....
मुझे यह पता
नहीं था.
इसलिए मैंने अपना जीवन
व्यर्थ गँवा दिया.!!"
"हे प्रभु,
मुझे थोडा आयुष्य दीजिये..!''
और मैं गिड़गिड़ाने लगा.!
इंद्र को मुझ पर दया आ गई.!!
इंद्र ने तथास्तु कहा
और मेरी नींद खुल गयी..!
मैं जाग गया..!
अब मैं वो दौलत कमाऊँगा
जो वहाँ चलेगी..!!

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अच्छा लगेगा..I

गीता और कुरान में इतना ही फर्क है

 🚩ॐ🚩 गीता और कुरान में इतना ही फर्क है-

एक मुसलमान गीता पढता है तो कलाम बन जाता है 
और देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होता है.

दूसरा मुसलमान कुरान पढ़कर जन्नत में 72 हूरें मिलने के लालच में फाँसी के फंदे तक पहुंच जाता है.

फर्क सिर्फ किताब का है.🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

ज़रूर पढ़ियेगा....... एक संवाद......

ज़रूर पढ़ियेगा.......

एक संवाद......

मुशीं फैज अली ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा : "स्वामी जी हमें बताया गया है कि अल्लहा एक ही है। यदि वह एक ही है, तो फिर संसार उसी ने बनाया होगा ?"

स्वामी जी बोले, "सत्य है।"

मुशी जी बोले ,"तो फिर इतने प्रकार के मनुष्य क्यों बनाये। जैसे कि हिन्दु, मुसलमान, सिख्ख, ईसाइ और सभी को अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ भी दिये। एक ही जैसे इंसान बनाने में उसे यानि की अल्लाह को क्या एतराज था। सब एक होते तो न कोई लङाई और न कोई झगङा होता।"

स्वामी हँसते हुए बोले, "मुंशी जी वो सृष्टी कैसी होती जिसमें एक ही प्रकार के फूल होते। केवल गुलाब होता, कमल या रंजनिगंधा या गेंदा जैसे फूल न होते!"

फैज अली ने कहा सच कहा आपने यदि एक ही दाल होती तो खाने का स्वाद भी एक ही होता। दुनिया तो बङी फीकी सी हो जाती!

स्वामी जी ने कहा, मुंशी जी! इसीलिये तो ऊपर वाले ने अनेक प्रकार के जीव-जंतु और इंसान बनाए ताकि हम पिंजरे का भेद भूलकर जीव की एकता को पहचाने।

मुशी जी ने पूछा, इतने मजहब क्यों ?

स्वामी जी ने कहा, " मजहब तो मनुष्य ने बनाए हैं, प्रभु ने तो केवल धर्म बनाया है।"

मुशी जी ने कहा कि, " ऐसा क्यों है कि एक मजहब में कहा गया है कि गाय और सुअर खाओ और दूसरे में कहा गया है कि गाय मत खाओ, सुअर खाओ एवं तीसरे में कहा गया कि गाय खाओ सुअर न खाओ; इतना ही नही कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि मना करने पर जो इसे खाये उसे अपना दुश्मन समझो।"

स्वामी जी जोर से हँसते हुए मुंशी जी से पूछे कि, "क्या ये सब प्रभु ने कहा है ?"

मुंशी जी बोले नही, "मजहबी लोग यही कहते हैं।"

स्वामी जी बोले, "मित्र! किसी भी देश या प्रदेश का भोजन वहाँ की जलवायु की देन है। सागर तट पर बसने वाला व्यक्ति वहाँ खेती नही कर सकता, वह सागर से पकङ कर मछलियां ही खायेगा। उपजाऊ भूमि के प्रदेश में खेती हो सकती है। वहाँ अन्न फल एवं शाक-भाजी उगाई जा सकती है। उन्हे अपनी खेती के लिए गाय और बैल बहुत उपयोगी लगे। उन्होने गाय को अपनी माता माना, धरती को अपनी माता माना और नदी को माता माना क्योंकि ये सब उनका पालन पोषण माता के समान ही करती हैं।"

"अब जहाँ मरुभूमि है वहाँ खेती कैसे होगी? खेती नही होगी तो वे गाय और बैल का क्या करेंगे? अन्न है नही तो खाद्य के रूप में पशु को ही खायेंगे। तिब्बत में कोई शाकाहारी कैसे हो सकता है? वही स्थिति अरब देशों में है। जापान में भी इतनी भूमि नही है कि कृषि पर निर्भर रह सकें।"

स्वामी जी फैज अलि की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, " हिन्दु कहते हैं कि मंदिर में जाने से पहले या पूजा करने से पहले स्नान करो। मुसलमान नमाज पढने से पहले वाजु करते हैं। क्या अल्लहा ने कहा है कि नहाओ मत, केवल लोटे भर पानी से हांथ-मुँह धो लो?"

फैज अलि बोला, क्या पता कहा ही होगा!

स्वामी जी ने आगे कहा, नहीं, अल्लहा ने नही कहा! अरब देश में इतना पानी कहाँ है कि वहाँ पाँच समय नहाया जाए। जहाँ पीने के लिए पानी बङी मुश्किल से मिलता हो वहाँ कोई पाँच समय कैसे नहा सकता है। यह तो भारत में ही संभव है, जहाँ नदियां बहती हैं, झरने बहते हैं, कुएँ जल देते हैं। तिब्बत में यदि पानी हो तो वहाँ पाँच बार व्यक्ति यदि नहाता है तो ठंड के कारण ही मर जायेगा। यह सब प्रकृति ने सबको समझाने के लिये किया है।"

स्वामी विवेका नंद जी ने आगे समझाते हुए कहा कि, " मनुष्य की मृत्यु होती है। उसके शव का अंतिम संस्कार करना होता है। अरब देशों में वृक्ष नही होते थे, केवल रेत थी अतः वहाँ मृतिका समाधी का प्रचलन हुआ, जिसे आप दफनाना कहते हैं। भारत में वृक्ष बहुत बङी संख्या में थे, लकडी. पर्याप्त उपलब्ध थी अतः भारत में अग्निसंस्कार का प्रचलन हुआ। जिस देश में जो सुविधा थी वहाँ उसी का प्रचलन बढा। वहाँ जो मजहब पनपा उसने उसे अपने दर्शन से जोङ लिया।"

फैज अलि विस्मित होते हुए बोला! "स्वामी जी इसका मतलब है कि हमें शव का अंतिम संस्कार प्रदेश और देश के अनुसार करना चाहिये। मजहब के अनुसार नही।"

स्वामी जी बोले , "हाँ! यही उचित है।" किन्तु अब लोगों ने उसके साथ धर्म को जोङ दिया। मुसलमान ये मानता है कि उसका ये शरीर कयामत के दिन उठेगा इसलिए वह शरीर को जलाकर समाप्त नही करना चाहता। हिन्दु मानता है कि उसकी आत्मा फिर से नया शरीर धारण करेगी इसलिए उसे मृत शरीर से एक क्षंण भी मोह नही होता।"

फैज अलि ने पूछा कि, "एक मुसलमान के शव को जलाया जाए और एक हिन्दु के शव को दफनाया जाए तो क्या प्रभु नाराज नही होंगे?"

स्वामी जी ने कहा," प्रकृति के नियम ही प्रभु का आदेश हैं। वैसे प्रभु कभी रुष्ट नही होते वे प्रेम सागर हैं, करुणा सागर है।"

फैज अलि ने पूछा तो हमें उनसे डरना नही चाहिए?

स्वामी जी बोले, "नही! हमें तो ईश्वर से प्रेम करना चाहिए वो तो पिता समान है, दया का सागर है फिर उससे भय कैसा। डरते तो उससे हैं हम जिससे हम प्यार नही करते।"

फैज अलि ने हाँथ जोङकर स्वामी विवेकानंद जी से पूछा, "तो फिर मजहबों के कठघरों से मुक्त कैसे हुआ जा सकता है?"

स्वामी जी ने फैज अलि की तरफ देखते हुए मुस्कराकर कहा, "क्या तुम सचमुच कठघरों से मुक्त होना चाहते हो?" फैज अलि ने स्वीकार करने की स्थिति में अपना सर हिला दिया।

स्वामी जी ने आगे समझाते हुए कहा, "फल की दुकान पर जाओ, तुम देखोगे वहाँ आम, नारियल, केले, संतरे, अंगूर आदि अनेक फल बिकते हैं; किंतु वो दुकान तो फल की दुकान ही कहलाती है। वहाँ अलग-अलग नाम से फल ही रखे होते हैं। " फैज अलि ने हाँ में सर हिला दिया।

स्वामी विवेकानंद जी ने आगे कहा कि, "अंश से अंशी की ओर चलो। तुम पाओगे कि सब उसी प्रभु के रूप हैं।"

फैज अलि अविरल आश्चर्य से स्वामी विवेकानंद जी को देखते रहे और बोले "स्वामी जी मनुष्य ये सब क्यों नही समझता?"

स्वामी विवेकानंद जी ने शांत स्वर में कहा, मित्र! प्रभु की माया को कोई नही समझता। मेरा मानना तो यही है कि, "सभी धर्मों का गंतव्य स्थान एक है। जिस प्रकार विभिन्न मार्गो से बहती हुई नदियां समुंद्र में जाकर गिरती हैं, उसी प्रकार सब मत मतान्तर परमात्मा की ओर ले जाते हैं। मानव धर्म एक है, मानव जाति एक है